⚖️ भारतीय राजनीति (Polity) टेस्ट
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- ✅ प्रत्येक प्रश्न: 1 अंक
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राष्ट्रपति पर महाभियोग: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 61
भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति को देश का संवैधानिक प्रमुख बनाया है। राष्ट्रपति का पद अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण है, इसलिए संविधान में उनके पद से हटाने की प्रक्रिया भी सामान्य पदाधिकारियों से अलग और विशेष रूप से कठोर रखी गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। राष्ट्रपति को केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
महाभियोग की कार्यवाही संसद के किसी भी सदन में शुरू की जा सकती है। जिस सदन में आरोप लगाया जाता है, उसके कम-से-कम एक-चौथाई सदस्यों द्वारा आरोपों पर हस्ताक्षर किए जाने आवश्यक हैं। इसके बाद राष्ट्रपति को 14 दिन का लिखित नोटिस दिया जाता है। आरोप लगाने वाले सदन में प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना आवश्यक है।
इसके बाद आरोपों की जांच संसद के दूसरे सदन द्वारा की जाती है। इस जांच के दौरान राष्ट्रपति को स्वयं उपस्थित होकर या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है। यदि जांच के बाद दूसरा सदन भी आरोप को सही मानते हुए प्रस्ताव को अपनी कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को उसी दिन पद से हटाया हुआ माना जाता है।
इस प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि भारतीय संविधान में “संविधान का उल्लंघन” शब्द की कोई विस्तृत परिभाषा नहीं दी गई है। इसलिए राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया अत्यंत गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया मानी जाती है।
भारत में आज तक किसी राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी नहीं हुई है। यह व्यवस्था राष्ट्रपति की संवैधानिक गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें संविधान के प्रति उत्तरदायी भी बनाती है।