UPSC POLITY TEST 28 – ARMY, POLICE, PCS, RAILWAY

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राजव्यवस्था टेस्ट – 20 प्रश्न

⚖️ भारतीय राजव्यवस्था (Polity) टेस्ट

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📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 20 प्रश्न
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द कब जोड़े गए?

भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) संविधान की मूल भावना और उद्देश्यों को स्पष्ट करती है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, UKPSC, UKSSSC, रेलवे, पुलिस, CTET, TET और अन्य सरकारी परीक्षाओं में प्रस्तावना से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

प्रस्तावना से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में यह प्रश्न शामिल है कि “समाजवादी”, “धर्मनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द संविधान की प्रस्तावना में किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए थे?

इसका सही उत्तर है—42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976।


प्रश्न और उत्तर

प्रश्न: संविधान की प्रस्तावना में “समाजवादी”, “धर्मनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए थे?

(A) 42वां संविधान संशोधन, 1976
(B) 44वां संविधान संशोधन, 1978
(C) प्रथम संविधान संशोधन, 1951
(D) 73वां संविधान संशोधन, 1992

सही उत्तर: (A) 42वां संविधान संशोधन, 1976


42वां संविधान संशोधन क्या था?

42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 भारतीय संविधान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण संशोधन माना जाता है। इसे कई बार “मिनी संविधान” (Mini Constitution) भी कहा जाता है, क्योंकि इस संशोधन के माध्यम से संविधान में व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए गए थे।

इसी संशोधन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में तीन महत्वपूर्ण शब्द जोड़े गए—

  1. समाजवादी (Socialist)
  2. धर्मनिरपेक्ष (Secular)
  3. अखंडता (Integrity)

संशोधन से पहले प्रस्तावना में भारत को “सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, लोकतंत्रात्मक गणराज्य” कहा गया था।

42वें संशोधन के बाद इसमें “समाजवादी, पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष” शब्द शामिल हुए और “राष्ट्र की एकता और अखंडता” की अभिव्यक्ति जोड़ी गई।


42वें संशोधन की मुख्य जानकारी

तथ्यजानकारी
संविधान संशोधन42वां संविधान संशोधन
वर्ष1976
प्रमुख कालखंडआपातकाल के दौरान
प्रस्तावना में जोड़े गए शब्दसमाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता
लोकप्रिय नाममिनी संविधान
प्रस्तावना में बदलावहाँ
वर्तमान महत्वअत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य

“समाजवादी” शब्द का अर्थ क्या है?

प्रस्तावना में समाजवादी (Socialist) शब्द भारत के सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों की ओर संकेत करता है।

भारतीय संदर्भ में समाजवाद का अर्थ सामान्यतः ऐसी व्यवस्था से जुड़ा है जिसमें सामाजिक और आर्थिक न्याय, अवसरों की समानता तथा संसाधनों के अधिक न्यायपूर्ण वितरण जैसे उद्देश्यों पर जोर दिया जाता है।

भारत का समाजवाद पारंपरिक साम्यवादी मॉडल से पूरी तरह समान नहीं है। भारतीय संविधान लोकतंत्र, मौलिक अधिकारों और मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ सामाजिक-आर्थिक न्याय की अवधारणा को अपनाता है।


“धर्मनिरपेक्ष” शब्द का अर्थ क्या है?

धर्मनिरपेक्ष (Secular) शब्द का अर्थ है कि राज्य किसी एक धर्म को अपना आधिकारिक धर्म नहीं मानता और नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।

भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकों को अपनी धार्मिक आस्था का पालन, प्रचार और प्रसार करने से संबंधित अधिकार प्राप्त हैं, जो संविधान के मौलिक अधिकारों में भी संरक्षित हैं।

धर्मनिरपेक्षता का उद्देश्य सभी धर्मों के प्रति संवैधानिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।


“अखंडता” शब्द क्यों जोड़ा गया?

42वें संविधान संशोधन के बाद प्रस्तावना में “राष्ट्र की एकता और अखंडता” की अभिव्यक्ति को स्थान मिला।

अखंडता (Integrity) का संबंध देश की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय एकजुटता से है।

इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और देश की अखंडता के महत्व को संवैधानिक रूप से रेखांकित करना था।


क्या प्रस्तावना में पहले कभी संशोधन हुआ था?

यह भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य है।

42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 प्रस्तावना में अब तक किया गया एकमात्र संवैधानिक संशोधन है।

इस संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में उपर्युक्त तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए।

इसलिए परीक्षा में यदि पूछा जाए—

“भारतीय संविधान की प्रस्तावना में संशोधन किस संविधान संशोधन द्वारा किया गया?”

तो उत्तर होगा:

42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976।


42वां संविधान संशोधन क्यों महत्वपूर्ण है?

42वें संशोधन के माध्यम से केवल प्रस्तावना में ही परिवर्तन नहीं किया गया था। संविधान के कई अन्य प्रावधानों में भी व्यापक बदलाव किए गए।

इसी कारण इसे अक्सर “मिनी संविधान” कहा जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 42वें संशोधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं—

  • प्रस्तावना में समाजवादी शब्द जोड़ा गया।
  • प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष/पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़ा गया।
  • प्रस्तावना में अखंडता से संबंधित शब्द जोड़ा गया।
  • मौलिक कर्तव्यों को संविधान में जोड़ा गया।
  • मौलिक कर्तव्यों को भाग IVA में रखा गया।
  • अनुच्छेद 51A में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया।
  • पंचायती राज से संबंधित विषयों सहित कई संवैधानिक क्षेत्रों में बदलाव किए गए।
  • संसद और केंद्र की शक्तियों से संबंधित कई प्रावधानों में परिवर्तन किया गया।

मौलिक कर्तव्य और 42वां संशोधन

42वें संविधान संशोधन का एक और अत्यंत महत्वपूर्ण परिणाम था मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) का संविधान में शामिल होना।

मौलिक कर्तव्यों को संविधान के भाग IVA में जोड़ा गया और इनके लिए अनुच्छेद 51A का प्रावधान किया गया।

प्रारंभ में संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके बाद वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य हैं।


प्रस्तावना में कौन-कौन से प्रमुख शब्द हैं?

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक—

“सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य”

के रूप में स्थापित करने की बात कही गई है।

साथ ही नागरिकों को—

  • न्याय
  • स्वतंत्रता
  • समानता

प्रदान करने तथा—

“बंधुता”

को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण आदर्श हैं।


42वें संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य

1. 42वां संविधान संशोधन किस वर्ष हुआ?

1976

2. प्रस्तावना में समाजवादी शब्द किस संशोधन से जोड़ा गया?

42वां संविधान संशोधन

3. धर्मनिरपेक्ष शब्द किस संशोधन से जोड़ा गया?

42वां संविधान संशोधन

4. अखंडता शब्द किस संशोधन से संबंधित है?

42वां संविधान संशोधन

5. 42वें संशोधन को किस नाम से जाना जाता है?

मिनी संविधान

6. मौलिक कर्तव्य किस संशोधन से जोड़े गए?

42वां संविधान संशोधन, 1976

7. मौलिक कर्तव्य संविधान के किस भाग में हैं?

भाग IVA

8. मौलिक कर्तव्य किस अनुच्छेद में हैं?

अनुच्छेद 51A


42वां और 44वां संविधान संशोधन: अंतर

प्रतियोगी परीक्षाओं में 42वें और 44वें संविधान संशोधन को लेकर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

आधार42वां संशोधन44वां संशोधन
वर्ष19761978
प्रमुख विशेषताव्यापक संवैधानिक परिवर्तनकई प्रावधानों में सुधार/परिवर्तन
प्रस्तावनासमाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता से संबंधित बदलावप्रस्तावना में कोई नया शब्द नहीं जोड़ा
मौलिक कर्तव्यजोड़े गएसमाप्त नहीं किए गए
संपत्ति का अधिकारमौलिक अधिकार के रूप में बना रहामौलिक अधिकारों से हटाया गया

प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले MCQ

प्रश्न 1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में “समाजवादी” शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

(A) 1वां
(B) 42वां
(C) 44वां
(D) 73वां

उत्तर: (B) 42वां

प्रश्न 2. “धर्मनिरपेक्ष” शब्द भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कब जोड़ा गया?

(A) 1950
(B) 1962
(C) 1976
(D) 1978

उत्तर: (C) 1976

प्रश्न 3. 42वें संविधान संशोधन को किस नाम से जाना जाता है?

(A) लोकतंत्र संशोधन
(B) मिनी संविधान
(C) संघीय संशोधन
(D) न्यायिक संशोधन

उत्तर: (B) मिनी संविधान

प्रश्न 4. मौलिक कर्तव्यों को संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

(A) 42वां संशोधन
(B) 44वां संशोधन
(C) 61वां संशोधन
(D) 73वां संशोधन

उत्तर: (A) 42वां संशोधन

प्रश्न 5. मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?

(A) अनुच्छेद 32
(B) अनुच्छेद 44
(C) अनुच्छेद 51A
(D) अनुच्छेद 368

उत्तर: (C) अनुच्छेद 51A

प्रश्न 6. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में अब तक कितनी बार संशोधन किया गया है?

(A) एक बार
(B) दो बार
(C) तीन बार
(D) चार बार

उत्तर: (A) एक बार


एक नजर में याद करें

42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 = मिनी संविधान

इसके साथ याद रखें:

प्रस्तावना → समाजवादी + धर्मनिरपेक्ष + अखंडता

और:

मौलिक कर्तव्य → भाग IVA → अनुच्छेद 51A

यह संयोजन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


निष्कर्ष

भारतीय संविधान की प्रस्तावना केवल संविधान की भूमिका नहीं है, बल्कि यह भारतीय गणराज्य के मूल आदर्शों और उद्देश्यों को सामने रखती है। 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 प्रस्तावना के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी संशोधन द्वारा “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्द जोड़े गए तथा “राष्ट्र की एकता और अखंडता” की अभिव्यक्ति को शामिल किया गया।

इसके अतिरिक्त इसी संशोधन द्वारा संविधान में मौलिक कर्तव्यों को भी जोड़ा गया।

इसलिए परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य को इस प्रकार याद रखा जा सकता है—

42वां संविधान संशोधन, 1976 = मिनी संविधान + प्रस्तावना में समाजवादी/धर्मनिरपेक्ष + अखंडता + मौलिक कर्तव्य

UPSC, SSC, UKPSC, UKSSSC, रेलवे, पुलिस, CTET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में संविधान से जुड़े प्रश्नों की तैयारी करते समय इस तथ्य को अवश्य याद रखें।

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