📜 इतिहास (History) टेस्ट
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करो या मरो का नारा किस आंदोलन में दिया गया था? जानिए भारत छोड़ो आंदोलन, 1942 और महात्मा गांधी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
परिचय
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में “करो या मरो” (Do or Die) एक अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण नारा है। यह नारा महात्मा गांधी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान दिया था।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस नारे को लेकर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, पुलिस, PCS, UKPSC, UKSSSC तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में भारत छोड़ो आंदोलन, अगस्त क्रांति, 8 अगस्त 1942, करो या मरो और गांधीजी से जुड़े प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
आज के प्रश्न में भी यही पूछा गया है—
प्रश्न: महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का नारा किस आंदोलन के दौरान दिया था?
उत्तर: भारत छोड़ो आंदोलन (1942)।
“करो या मरो” का नारा किसने दिया था?
“करो या मरो” का नारा महात्मा गांधी ने दिया था।
यह नारा भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दिया गया था। गांधीजी ने 8 अगस्त 1942 को बंबई (वर्तमान मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान में ऐतिहासिक भाषण दिया।
इस भाषण के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया।
ग्वालिया टैंक मैदान को आज अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है।
परीक्षा में याद रखें
करो या मरो → महात्मा गांधी
करो या मरो → भारत छोड़ो आंदोलन
भारत छोड़ो आंदोलन → 1942
अगस्त क्रांति → 1942
भारत छोड़ो आंदोलन कब शुरू हुआ था?
भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में शुरू हुआ था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) ने 8 अगस्त 1942 को बंबई में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया।
इसके बाद 9 अगस्त 1942 को गांधीजी सहित कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी कारण 9 अगस्त भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास में विशेष महत्व रखता है।
भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रांति क्यों कहा जाता है?
भारत छोड़ो आंदोलन को “अगस्त क्रांति” भी कहा जाता है क्योंकि इसका निर्णायक आह्वान अगस्त 1942 में किया गया था।
8 अगस्त 1942 को कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकार किया और इसके अगले दिन व्यापक गिरफ्तारियां शुरू हुईं।
इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को भारत से समाप्त करने की मांग को निर्णायक रूप दिया।
इसलिए परीक्षा में निम्नलिखित दोनों नामों को एक साथ याद रखना चाहिए—
भारत छोड़ो आंदोलन = अगस्त क्रांति
“करो या मरो” का अर्थ क्या था?
“करो या मरो” का उद्देश्य भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए अंतिम और निर्णायक संघर्ष के लिए प्रेरित करना था।
गांधीजी का संदेश था कि अब भारत की स्वतंत्रता के लिए पूरी शक्ति से संघर्ष किया जाए और स्वतंत्रता प्राप्त किए बिना पीछे न हटें।
यह नारा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण में जनता के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि
भारत छोड़ो आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे कई राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां थीं।
द्वितीय विश्व युद्ध
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ। ब्रिटिश सरकार ने भारत के नेताओं से पर्याप्त राजनीतिक सहमति लिए बिना भारत को युद्ध में शामिल कर दिया।
इससे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच तनाव बढ़ा।
क्रिप्स मिशन
1942 में ब्रिटिश सरकार ने सर स्टैफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन भारत भेजा।
इस मिशन का उद्देश्य भारतीय नेताओं को युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार का सहयोग प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव देना था।
लेकिन प्रस्तावों पर सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध निर्णायक आंदोलन का रास्ता अपनाया।
भारत छोड़ो प्रस्ताव कब पारित हुआ?
भारत छोड़ो प्रस्ताव 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में पारित हुआ।
इसी अवसर पर गांधीजी ने अपना प्रसिद्ध संदेश दिया—
“करो या मरो”
यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के सबसे निर्णायक चरणों में से एक था।
9 अगस्त 1942 का क्या महत्व है?
भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया।
9 अगस्त 1942 को गांधीजी को गिरफ्तार करके आगा खान पैलेस में रखा गया।
जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित अनेक कांग्रेस नेता भी गिरफ्तार किए गए।
नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन कई स्थानों पर स्वतःस्फूर्त रूप से फैल गया।
भारत छोड़ो आंदोलन की प्रमुख विशेषताएं
भारत छोड़ो आंदोलन की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं—
1. ब्रिटिश शासन का तत्काल अंत
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था।
2. व्यापक जनभागीदारी
इस आंदोलन में विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों ने विभिन्न रूपों में भाग लिया।
3. नेताओं की गिरफ्तारी
आंदोलन शुरू होते ही ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया।
4. भूमिगत गतिविधियां
नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाया।
5. महिलाओं की भूमिका
महिलाओं ने भी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में कांग्रेस का झंडा फहराया और वे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनीं।
भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा आसफ अली की भूमिका
भारत छोड़ो आंदोलन से संबंधित प्रश्नों में अरुणा आसफ अली का नाम महत्वपूर्ण है।
9 अगस्त 1942 को जब कांग्रेस के अधिकांश बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे, तब अरुणा आसफ अली ने ग्वालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराया।
इसी कारण उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन की प्रमुख महिला नेताओं में गिना जाता है।
परीक्षा तथ्य
अरुणा आसफ अली → भारत छोड़ो आंदोलन
9 अगस्त 1942 → ग्वालिया टैंक मैदान में झंडा फहराया
भारत छोड़ो आंदोलन और “करो या मरो”
भारत छोड़ो आंदोलन तथा “करो या मरो” को अलग-अलग याद करने के बजाय एक साथ याद करना सबसे आसान है।
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| करो या मरो का नारा | महात्मा गांधी |
| आंदोलन | भारत छोड़ो आंदोलन |
| वर्ष | 1942 |
| भारत छोड़ो प्रस्ताव | 8 अगस्त 1942 |
| प्रमुख स्थान | बंबई |
| ग्वालिया टैंक मैदान | वर्तमान अगस्त क्रांति मैदान |
| व्यापक गिरफ्तारियां | 9 अगस्त 1942 |
| दूसरा नाम | अगस्त क्रांति |
आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करने वाले नारों का व्यापक प्रयोग हुआ।
सबसे प्रसिद्ध नारा था—
“करो या मरो”
यह नारा गांधीजी के नेतृत्व में आंदोलन की निर्णायक भावना को दर्शाता था।
भारत छोड़ो आंदोलन और अन्य आंदोलनों में अंतर
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर विभिन्न गांधीवादी आंदोलनों को आपस में मिलाकर प्रश्न पूछा जाता है।
| आंदोलन | वर्ष | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | नील की खेती |
| असहयोग आंदोलन | 1920–22 | चौरी-चौरा के बाद वापस लिया गया |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930 | दांडी मार्च/नमक कानून |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 | “करो या मरो” |
इस तालिका से चारों आंदोलनों का अंतर आसानी से याद किया जा सकता है।
चौरी-चौरा और असहयोग आंदोलन
इस विषय में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि चौरी-चौरा की घटना भारत छोड़ो आंदोलन से संबंधित नहीं थी।
4 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में हिंसक घटना हुई थी। इसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
इसलिए—
चौरी-चौरा → असहयोग आंदोलन की वापसी
जबकि—
करो या मरो → भारत छोड़ो आंदोलन
यह अंतर प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत उपयोगी है।
भारत छोड़ो आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का अंतिम बड़ा जनांदोलन था।
यद्यपि ब्रिटिश सरकार ने इसे कठोरता से दबाने का प्रयास किया, लेकिन इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में ब्रिटिश शासन को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं था।
आंदोलन ने स्वतंत्रता की मांग को और अधिक व्यापक बनाया तथा भारत की स्वतंत्रता की दिशा में अंतिम चरण को मजबूत किया।
इसके कुछ वर्षों बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
परीक्षा के लिए भारत छोड़ो आंदोलन के महत्वपूर्ण तथ्य
1. भारत छोड़ो आंदोलन कब हुआ?
1942
2. भारत छोड़ो आंदोलन का दूसरा नाम क्या है?
अगस्त क्रांति
3. “करो या मरो” का नारा किसने दिया?
महात्मा गांधी
4. भारत छोड़ो प्रस्ताव कब पारित हुआ?
8 अगस्त 1942
5. भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुख केंद्र कौन सा शहर था?
बंबई (वर्तमान मुंबई)
6. ग्वालिया टैंक मैदान का वर्तमान नाम क्या है?
अगस्त क्रांति मैदान
7. 9 अगस्त 1942 का महत्व क्या है?
कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी और आंदोलन के व्यापक प्रसार का महत्वपूर्ण दिन।
8. भारत छोड़ो आंदोलन में झंडा फहराने वाली प्रमुख महिला कौन थीं?
अरुणा आसफ अली
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण MCQs
प्रश्न 1. “करो या मरो” का नारा किसने दिया था?
(A) जवाहरलाल नेहरू
(B) महात्मा गांधी
(C) सुभाष चंद्र बोस
(D) सरदार पटेल
उत्तर: (B) महात्मा गांधी
प्रश्न 2. “करो या मरो” का नारा किस आंदोलन से संबंधित है?
(A) असहयोग आंदोलन
(B) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(C) भारत छोड़ो आंदोलन
(D) चंपारण सत्याग्रह
उत्तर: (C) भारत छोड़ो आंदोलन
प्रश्न 3. भारत छोड़ो आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?
(A) 1930
(B) 1935
(C) 1940
(D) 1942
उत्तर: (D) 1942
प्रश्न 4. भारत छोड़ो प्रस्ताव कब पारित किया गया था?
(A) 8 अगस्त 1942
(B) 9 अगस्त 1942
(C) 15 अगस्त 1942
(D) 26 जनवरी 1942
उत्तर: (A) 8 अगस्त 1942
प्रश्न 5. भारत छोड़ो आंदोलन को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
(A) नमक आंदोलन
(B) अगस्त क्रांति
(C) खिलाफत आंदोलन
(D) स्वदेशी आंदोलन
उत्तर: (B) अगस्त क्रांति
प्रश्न 6. 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ग्वालिया टैंक मैदान में तिरंगा किसने फहराया था?
(A) सरोजिनी नायडू
(B) कस्तूरबा गांधी
(C) अरुणा आसफ अली
(D) सुचेता कृपलानी
उत्तर: (C) अरुणा आसफ अली
प्रश्न 7. चौरी-चौरा की घटना के बाद महात्मा गांधी ने कौन सा आंदोलन वापस लिया?
(A) भारत छोड़ो आंदोलन
(B) असहयोग आंदोलन
(C) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(D) व्यक्तिगत सत्याग्रह
उत्तर: (B) असहयोग आंदोलन
One-Liner Revision
करो या मरो → महात्मा गांधी
करो या मरो → भारत छोड़ो आंदोलन
9 अगस्त 1942 → प्रमुख कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी
ग्वालिया टैंक मैदान → वर्तमान अगस्त क्रांति मैदान
अरुणा आसफ अली → 1942 में ग्वालिया टैंक मैदान पर तिरंगा
चौरी-चौरा → असहयोग आंदोलन की वापसी
भारत की स्वतंत्रता → 15 अगस्त 1947
निष्कर्ष
“करो या मरो” का नारा महात्मा गांधी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दिया था। यह नारा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम और निर्णायक चरण का प्रतीक बन गया।
8 अगस्त 1942 को बंबई में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ और गांधीजी ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया। इसके बाद 9 अगस्त 1942 से प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हुईं और आंदोलन देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गया।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य हैं—
करो या मरो → महात्मा गांधी → भारत छोड़ो आंदोलन → 1942 → अगस्त क्रांति
इन पांच तथ्यों को एक साथ याद कर लेने से इस पूरे टॉपिक से जुड़े कई प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।